अध्यात्मिक लेखिका “शकुन्तला मिश्रा” जी से “मनीष ओझा” ने की एक बेहतरीन बातचीत !

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काफ़ी इंतज़ार करना पड़ा आपको, इसलिए मैं सबसे पहले आपसे क्षमा चाहता हूँ |

जी नहीं   क्षमा जैसी कोई बात नहीं हैं मनीष जी | थोड़ी परेशानी ज़रूर हुयी लेकिन ये इंतज़ार कोई बहुत मुश्किल काम नहीं था |

हाहाहा…………. तो अब शुरू करते हैं बातचीत का सिलसिला…. 

जी अवश्य ……

1- आज के दाैर में अध्यात्म पर पुस्‍तक लिखने की क्या वजह हैै ?

आज हम अनेक मार्गों से साधन तो जुटा लेतें हैं पर शांति के लिए तरसतें हैं | हम खुद नहीं जानते कीजीवन जीना क्या है इसे कैसे जियें |अध्यात्म हमेंअजर -अमर और असीम से जोड़ता है | ईश्वरीय नियम से जुड़ना ही अध्यात्म है और जीवन के हर क्षेत्र में इसकी आवश्यकता है |अध्यात्म हमें शांति और आनंद दे सकता है | तमाम भौतिक साधनों के बाद भी रंच भर शांति को तरसतें हैं अध्यात्म में ज्ञान और उर्जा दोनों समाहित है |
2-  समर्पण आपकी पुस्‍तक का नाम है इसके बारे में चन्द बातें पाठकों से
साझा करें !

समर्पण अर्थात नियामक पर पूर्ण आस्था हम सभी यहाँ तक की ईश्वर भी प्रकृति के नियम से बंधे है ,नियम के विपरीत नहीं जाते .नियम पर पूर्ण आस्था ही समर्पण है |10446370_1489799804592007_2719052240890457658_n

3- आप लिखती बहुत पहले से हैं ,  फिर पुस्तक देर से लाने के पीछे क्या कारण रहा  ?

जी यह सत्य है की पुस्तक देर से अपने स्वरूप में आइ है ,बहुत प्रयास के बावजूद कुछ ऐसी बाधा आती गई और इतना समय लगा कभी अपनी कभी प्रकाशक  की |

4-  आपकी एक पुस्तक सफलता के रास्तों के बारे में बात करती हैै जो हम सब
के लिये बहुत उपयोगी है .   यह विषय कैसे मन में आया ?

” सफलता का रहस्य ” इस पुस्तक में मेरे तजुर्बे की छाप अधिक है | मैं काम को शौक की तरह लेती हूँ अक्सर कुशलता और जानकारी के आभाव में हमारा श्रम ब्यर्थ हो जाता है और हम दुखी होतें है | काम के संकल्प में श्रम के साथ सार्थक भाव भी महत्वपूर्ण होता है |यह बात अधिक से अधिक लोग जाने इसलिए मैंने इस पुस्तक को लिखा | मैं विश्वास के साथ कहती हूँ यह पुस्तक सभी ( किशोर ,युवा और अभिभावक ) के लिए हैं ,सबके काम की है और पसंद की गई है |

5-  प्रकाशन में किन किन कठिनाईयों का सामना करना पडा ?

मैं खुद पर कुछ भी खर्च नहीं करती पर सार्थक निवेश पर ध्यान देती हूँ घर से दिक्क्त नहीं हुई पर प्रकाशको की तरफ से हुई |इसलिए  समय लगा |

6-  आज के दौर में अध्यात्मिक पुस्तकें मास को अपील नहीं करती ऐसे में
पुस्तक बिक्री  में किस प्रकार की समस्या आयी ?

हम अध्यात्म को किसी धर्म से जोड़कर देखतें हैं ये सही नहीं है |अध्यात्म जीवन के नियम का नाम है यह बात समझा सकूँ तो अच्छा | हम सुनतें हैं न -सत्य बोलो, लोगों की मदद करो ,मेहनत करो ,ईमानदार बनो ये सब अध्यात्म है | ईश्वरीय नियम से जुड़ना ही अध्यात्म है | अध्यात्म के अभाव में आज बच्चे अशांत हो रहे है ,धैर्य की कमी है आज लोग इस बात को समझ रहे है और ऐसी पुत्के लेतें हैं !

7-  मुक्ति के विषय पर संछेप में प्राकाश डालें !

मुक्ति का अर्थ है छूटना | हम दुखों से छूटने के सन्दर्भ में मुक्ति की बात करतें है |सुखों से छूटना कोई नहीं चाहता |देवलोक में मुक्ति की बात नहीं हैं यह सांसारिक शब्द है ,जहां सुख -शांति -समृद्धि है वहां कोई मुक्ति नहीं चाहता |अध्यात्म के नियम मुक्ति की राह आसान  करतें हैऔर  सुख शान्ति प्रदान करतें |

बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके | आपको बहुत बहुत धन्यवाद मैम इतना कीमती वक़्त देने के लिए  |

धन्यावाद मनीष जी ! आपने बड़े उपयोगी प्रश्न पूछे है !